मेरा यह लेख 'सजग समाचार' के ०३-०९ अगस्त, २००९ के अंक में प्रकाशित हुआ था. आर.टी.आई और जुडीशियरी के सम्बन्ध में लिखा गया यह लेख इस बात पर आधारित है कि न्यायपालिका को आखिर आर.टी.आई के अंतर्गत आकर अपने संपत्ति का ब्यौरा देने में क्या तकलीफ है ? आर.टी.आई लोकतंत्र में जनता के लिए एक सशक्त औजार है भ्रष्टाचार निवारण के लिया वहीँ न्यायपालिका लोकतंत्र का एक प्रतिष्ठित स्तम्भ है. ऐसे में सूचना के अधिकार के तहत अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजानिक करने के लिए न्यायपालिका को सर्वप्रथम आगे आना चाहिए.


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