हिंदी पत्रकारिता विभाग के ग्रुप-डी के छात्रों ने सामूहिक प्रयास से अपना पहला लैब जर्नल प्रकाशित किया. इस ग्रुप के संपादक कि भूमिका प्रशान्त चाहल ने निभायी. समूह में कुल 09 अन्य कार्यरत छात्र भी थे जिनके नाम क्रमशः मयंक, मोहित, रमेश, ममता, प्रीती, बलराम, प्रतीक, योगेश और प्रवीण है. सभी छात्रों ने अपने विशिष्ट योगदान से इस लैब जर्नल को सफलता पूर्वक प्रकाशित किया.
सम्पादकीय स्तम्भ में मेरा सम्पादकीय लेख "अब पाचवे स्तम्भ कि ज़रुरत" लोकतंत्र में एक नए संवाद, संचार और व्ययास्थापक कि ज़रूरतों को तलाशता है, साथ ही पाचवे लोकतंत्रीय स्तम्भ
कि बात करता है.



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